Wednesday, August 20, 2025

भारत की धरती से बाहर भारत माँ की आजादी के लिए किए गए प्रयासों को समर्पित स्वरचित गीत .....

 भारत की धरती से बाहर भारत माँ की आजादी के लिए किए गए प्रयासों को समर्पित स्वरचित गीत .....

(गीत "आओ बच्चो तुम्हें दिखाएं ...."  की तर्ज पर)


आओ मित्रों तुम्हें सुनाएं, कहानी हिंदुस्थान की ।

आजादी के अमृत हेतु, किए गए बलिदान की ।।

वंदे मातरम् , वंदे मातरम् , वंदे मातरम् , वंदे मातरम् 


सात समुद्र पार भी देखो, आजादी प्रयत्नों को ।

गदर पार्टी की नींव पड़ी, सोहन भाकना के यत्नों को ।

लाला हरदयाल करतार सराभा, ऐसे ऐसे रत्नों को ।

हिंदुस्तान गदर अखबार चलाया, गूंजे गदरी पन्नों को ।

अमेरिका कनाडा में भी, लगाते बाजी जान की ।।1।।  

आजादी के अमृत हेतु, किए हर बलिदान की ...........


लन्दन की धरती पर भी, दीवाने मतवाले  थे |

श्याम जी कृष्ण वर्मा जैसे, वीरों ने सम्भाले थे |

इंडिया हाउस को केंद्र बनाकर,  क्रान्ति  लाने वाले थे |

सावरकर रचित पुस्तक को, अंग्रेज मिटाने वाले थे |

कर्जन वायली की मुक्ति गाथा, धींगडा के यशगान की  ।।2।।

 आजादी के अमृत हेतु, किए हर बलिदान की ...........


उन्नीस सौ पन्द्रह में देखो, अंतरिम सरकार बनी ।

राजा महेंद्र प्रताप द्वारा, काबुल में पहली बार बनी ।

बरकतउल्ला संग अंग्रेजों से, जेहाद की हुंकार बनी 

देखो कैसे कहां कहाँ पर, आजादी की पतवार बनी

प्रथम तिरंगा लहराया, मैडम कामा के योगदान की ।।2।। 

आजादी के अमृत हेतु, किए हर बलिदान की .....


कैसे भूले रासबिहारी को, नेता सुभाष जी बोस को |

जापान जर्मनी युद्ध बंदियों से , बनी हुई उस फौज को |

खून दो आजादी ले लो. उस अमर जयघोष को |

आजाद हिंद सरकार बनाई, दिल्ली चलो के जोश को |

लाल किले ट्रायल से कांपी, चूलें इंगलिस्तान की ।।4।। 

आजादी के अमृत हेतु, किए हर बलिदान की .....


आओ मित्रों तुम्हें सुनाएं, कहानी हिंदुस्थान की ।

आजादी के अमृत हेतु, किए हर बलिदान की ।।

वंदे मातरम् , वंदे मातरम् , वंदे मातरम् , वंदे मातरम् 


Tuesday, September 24, 2013

हाल ही में लिखी कुछ क्षणिकाएँ


मुख्यमंत्री का फर्ज निभाओ  
बोधगया बिहार के आतंकी हमले के बाद 
माननीय मुख्यमंत्री जी घटना स्थल का करने गए दौरा
विस्फोट से पस्त, एक टूटी सी दीवार को देखकर विचलित हुए थोडा
नजदीक जाकर देखा, उस पर रक्तिम धब्बों से लिखा था कोरा कोरा
नितीश जी , अब तो होश में आओ
Namo Threat का चश्मा हटाओ
और Terror Threat का चश्मा लगाओ
प्रधानमंत्री कौन बनेगा - इसकी चिंता छोड़ो
मुख्यमंत्री का फर्ज निभाओ  

Candle मार्च
कंप्यूटर प्रेमी वर्ग आजकल काफी जागरूक है
सामाजिक मुद्दों कों लेकर अति भावुक है
अगर किसी अहम मुद्दे पर Candle मार्च का आह्वान आता है
तो वह अपने दायित्व से जी नहीं चुराता है
बाहर निकलर अव्यवस्था नहीं  बढाता है
बल्कि मोमबत्ती  भी "मोमबत्ती जलाओ डॉट कॉम" पर जलाता है ।

Laughter क्लब 
एक पार्क में एक Laughter क्लब चल रहा था 
अच्छी खासी भीड़ थी, बड़ा उन्मुक्त माहौल बन रहा था 
शिक्षक (Coach) कुछ जोर से कहता हुआ दहाड़ रहा था 
और बाकी सारा जनार्दन खुलकर ठहाके मार रहा था 
उत्सुकतावश हम पास गए और कान लगाकर सुनी शिक्षक की बात 
कह रहा था पेट्रोल-डीजल के दाम गिरेंगे आज की रात

राजनीति में Direct Placement जिन्दाबाद 
दामिनी काण्ड में सबसे अधिक दुर्दांत भूमिका निभाने वाले को
सबसे कम सजा मिली है 
इससे पेशेवर बाल अपराधियों को बड़ी हिम्मत मिली है 
18 साल तक निडर होकर करो सब अपराध 
उसके बाद राजनीति में Direct Placement जिन्दाबाद ।

सर्दियों में चुनाव
सर्दियों में चुनाव होना फायदेमंद दीखता है
ऐसा कुछ संभावित पराजित प्रत्याशियों को लगता है
क्योंकि इन दिनों में बन्दर वाली टोपी पहनी जा सकती है
और मुंह पर लगी हार की कालिग छिपाई जा सकती है    ।

इस देश का Default ऑपरेटिंग सिस्टम
Microsoft के इंडिया हेड ने 
बिल गेट्स को लगाया फोन
कुछ देर रहा मौन
फिर डरते डरते निकली उसकी टोन
बोला, सर, अब भारत में Microsoft के अस्तित्व को खतरा है
सुना है भारत में कोई नया ऑपरेटिंग सिस्टम उतरा है 
कल ही एक दल के कद्दावर युवा नेता ने कहा है 
कि हमारा दल ही इस देश का Default ऑपरेटिंग सिस्टम है और रहा है 



Monday, September 24, 2012

स्वामी जी को याद करें

शीर्षक : स्वामी जी को याद करें  
(स्वामी विवेकानंद जी के 150 वें जयंती वर्ष यानी सार्धशती के अवसर पर समर्पित)


आओ कविता चलें अतीत में, मिलकर भारत का गौरवनाद करें  !
नरेन्द्रनाथ से बने विवेकानंद, उन स्वामी जी को याद करें  !!

विश्वनाथ दत्त के घर में जन्मे, माँ भुवनेश्वरी का मातृत्व पाया  
बिलेश्वर से माँगा था यह रत्न, इसीलिए बालक बिले कहलाया  
तार्किक बुद्धि, करुणा, संन्यासी प्रेम, इन गुणों ने जिसको महकाया  
हुक्के सारे एक सरीखे पिताजी, यह कहकर जाति भेद मिटाया
दीखने लगे जिसके पात चिकने, उस होनहार के लिए हरेक फरियाद करे 
           नरेन्द्रनाथ से बने विवेकानंद........................

"ईश्वर दिखता है क्या", प्रश्न सीधा यह परमहंस पर दागा  
"तुम सम बतियाता हूँ मैं माँ से", यह सुन संभ्रम नरेंद्र का भागा 
धारा गुरु रामकृष्ण को ठोक बजाकर, दिव्य अनुभव अंतस में जागा 
धन,सुख, समृद्धि थे गए मांगने, पर माँ से भक्ति-विवेक-वैराग्य माँगा  
ऎसी दिव्य गुरु-शिष्य गौरव गाथा से,  आओ इक बार संवाद करें  
          नरेन्द्रनाथ से बने विवेकानंद........................

बनकर परिव्राजक भारत को जाना, नर सेवा को नारायण सेवा माना 
कन्याकुमारी की श्रीपाद शिला पर , भारतोद्धार का संकल्प ठाना  
"बहनों-भाइयों" कह शिकागो सम्मेलन जीता , दुनिया ने हिंदुत्व का लोहा माना  
कट्टरता, धर्मान्धता, मतान्तरण पर किया प्रहार, जग ने शांति मन्त्र को जाना 
निवेदिता, रामतीर्थ जैसों ने जिन्हें गुरु स्वीकारा, ऐसे संत का चित्रण आओ निर्बाध करें  
           नरेन्द्रनाथ से बने विवेकानंद........................

राष्ट्रप्रेम का गहन समुद्र जिनके, अंतःकरण में हिलोरे लेता था  
भारत भू के व्यथितों का हाल, जिन्हें कष्ट असंख्य देता था  
लौटे भारत हुए आलिंगनबद्ध माटी में, भारत का स्वाभिमान जबरदस्त चेता था  
नवयुवकों को किया प्रेरित स्वातंत्र्य हित, "उत्तिष्ठत जाग्रत " का उद्घोष जिनका चहेता था  
"दरिद्रदेवो भव" के नव मन्त्र दाता, उस महामानव के लिए आओ जिंदाबाद करें 
           नरेन्द्रनाथ से बने विवेकानंद........................

आज आजादी तो है पर राष्ट्र त्रस्त है , सत्ता वोटबैंक, घोटालों में मस्त है  
भ्रष्टाचार, आतंक, घुसपैठ का , परचम सब ओर सरपरस्त है 
लेकिन अँधेरे में भी तीव्र प्रकाश पुंज , स्वामी जी का जीवन समस्त है  
समाज निर्माण हित कुछ गर गुजरने का , यह सार्ध शती अवसर जबरदस्त है 
आओ स्वामी जी की के संदेशों से, भारत माँ को पुनः जगत्गुरू निर्विवाद करें 
           नरेन्द्रनाथ से बने विवेकानंद........................

आओ कविता चलें अतीत में, मिलकर भारत का गौरवनाद करें  !
नरेन्द्रनाथ से बने विवेकानंद, उन स्वामी जी को याद करें  !!

Tuesday, January 18, 2011

A Patriotic English Rhyme

Bharat is my Nation
A great heavenly Creation
Its prosperity is our duty
Keeping its cultural beauty
It is my mother
It is your mother
It is our mother
Bowing to its soil and wind
Let's all say "Jai Hind"

Friday, October 16, 2009

शुभ दीपावली !

जगमग दीपों की पंक्ति का हो त्योहार दीवाली
हर तरफ ख़ुशी व रौनक का हो उपहार दीवाली
रूठों को भी मना लेने की हो मनुहार दीवाली
अपने स्नेह भरे दिल का हो विस्तार दीवाली
सुख-समृद्धि की आपके लिए हो भरमार दीवाली
शुभ हो - शुभ हो - शुभ हो , आपको बारम्बार दीवाली

Wednesday, October 14, 2009

चाँद की तलाश

मद्धम सी बहती हवा थी
तारों की चमक जवां थी
ऐसे लम्बी गहन निशा में
चाँद अकेला भटक रहा था
तारों के बीच में से
अपना मार्ग तलाश रहा था
और
तलाश रहा था ऐसे किसी को
जिसे वो अपना कह सके
दोस्ती के प्रवाह में बह सके
मगर बेचारा अनभिज्ञ था
नहीं जानता था की
सच्चे दोस्त
नुमाइश के लिए नहीं होते
वो हर पल तुम्हारे साथ रहते हैं
ठीक उसी तरह
जैसे खुशबू गुलाब से जुदा नहीं होती
उनके हाथ हमेशा तैयार होते हैं
तुम्हारे स्वागत को
आलिंगन को
उनका संबल हमें देता है
आत्मविश्वास
हर कठिनाई में खडा होने का
उनसे मिलना
हमारे चेहरे की सुन्दरता पर
चार चाँद लगा देता है
हमारे जीवन को संतोष का
उपहार ला देता है
मगर जिस तरह
किताब खोले बगैर
सिर्फ उसको देखने भर से
पढ़ी नहीं जाती
ठीक उसी तरह
तुम उसी दोस्त को दूर समझकर
याद करते हो
आंसू बहाते हो
जो हमेशा तुम्हारे सर्वाधिक करीब है
परन्तु कौन समझाए नादान चाँद को
कि उसे मिल सकता है जल्द ही
ऐसा साथी, ऐसा हमसफ़र
पर रात भर भटकना बंद करे वो
तभी दीदार होगा चांदनी का
जो उसके बेहद करीब है
बेहद करीब ...

Wednesday, October 7, 2009

क्या यह कम है ?

इस दगाबाज जमाने में
जहाँ मैं और सिर्फ मैं की आवाज गूंजती है
वहां आज भी हम मैं और तुम नहीं हैं
आज भी हम हम हैं
क्या यह कम है ....................

जहाँ लोग अपना दर्द जबरन
दूसरों पर उडेलने की नित नई चाल खोजते हैं
वहां आज भी एक दूसरे के गम को
अपने सर ओढ़ने की शिद्दत में हम हैं
क्या यह कम है ....................

जहाँ चिराग लेकर ढूँढने से भी
प्रेरणा दे सके वो बाती नहीं मिलती
वहां आज भी एक दूसरे के लिए
प्रेरणापुंज स्वरुप हम हैं
क्या यह कम है ....................

जहाँ हल्की से ऊँचाई पर पहुँचते ही
गिराने वालों की लम्बी कतारें लग जाती हैं
वहां आज भी एक दुसरे को बुलंदियों पर
देखने को आतुर हम हैं
क्या यह कम है ....................

जहाँ उम्मीदों के बचे खुचे
दरार वाले दीये तक मिटाने के
षड़यंत्र निरंतर होते हैं
वहां आज भी एक दूसरे की जीवन राह में
सूरज बनने के इच्छुक हम हैं
क्या यह कम है ....................

और अंत में ....
इस कुटनीतिक दुनिया में
इस टेढी मंशा वाले सीधे समाज में
जहाँ इंसान इंसान का शत्रु होकर
हैवान बनता जा रहा है
अपने क्षुद्र स्वार्थो के चक्रव्यूह में
नित नए पाप करता जा रहा है
भगवान् इंसान के दिल का
हर रोज मरता जा रहा है
वहां आज भी भगवान् न सही
पर भगवान् जैसी किसी दुर्लभ चीज को
एक दूसरे में खोज रहे हम हैं
क्या यह कम है ....................
क्या यह कम है ....................