Wednesday, September 16, 2009
पावन लक्ष्य !
संघ तंत्र के मूल मन्त्र में !
छलके टप-टप प्रेम धरा का ,
जन-जन के हृदय अनंतर में !!
अहो भाग्य मिल गयी डगर ,
भटक चुके इन कदमों को !
पावन लक्ष्य पुनीत साध्य,
दे तृप्ति व्याकुल नयनों को !!
परम वैभव की भव्य उत्कंठा,
कोटि-कोटि कंठ आज गुंजाते हैं !
इस भग्न-विखण्डित राष्ट्र-देव को,
पुनः जोड़ने का प्राण उठाते हैं !!
एक पुंज से ज्योतित जगमग ,
तमस छिपा गहंतर में !
छलके टप-टप प्रेम धरा का ,
जन-जन के हृदय अनंतर में !!
अंग्रेजी क्यों जरूरी है ?
हिन्दी का पठन पाठन हमारे लिए जरूरी है
पर ये जानने में भी क्या हर्ज़ है कि
अंग्रेज़ी हमारे लिए क्यों जरूरी है ?
अंग्रेजी अगर नहीं होती तो ......
एक खाते-पीते किसान का होनहार बेटा रामू
छठी कक्षा में अंग्रेजी में फ़ेल होकर
लज्जा के कारण घर से भागकर दिल्ली कैसे आता ?
और डॉ बनर्जी के यहाँ नौकर की महत्त्वपूर्ण नौकरी कैसे पाता ?
यदि वो अपनी मातृभाषा में पढ़कर आगे बढ़ता
तो हमारे जैसे सभ्य समाज के यहाँ बर्तन कौन रगड़ता ?
बेशक सभ्य समाज की सुविधा ही , प्रगत राष्ट्र की धुरी है
इसलिए देश हित में अंग्रेजी जरूरी है .........
अंग्रेजी अगर नहीं होती तो ....
हमारी गली के नुक्कड़ पर रहने वाले भोला जैसे लोग
फ़िर ऑटो रिक्शा थोड़े ही चलाते
परिणामतः सडकों पर निजी वाहनों की बाढ़ आनी थी
प्रदूषण बढ़ जाता, तेल अधिक खपता
जाम के कारण पूरी कानून व्यवस्था बिगड़ जानी थी
मातृभाषा प्रेम से कहीं ज्यादा, देश की व्यवस्था जरूरी है
इसलिए देश हित में अंग्रेजी जरूरी है ......
अंग्रेजी अगर नहीं होगी तो ...
हमारा plumber भी कान्वेंट स्चूल का admission interview पास कर जाएगा
और फिर उसका Low profile पुत्र मेरे High profile बेटे के साथ शिक्षा पायेगा
ऐसे में भगवान् न करे , कहीं वो मेरे
Bright सुपुत्र को पढ़ाई में पछाड़ गया तो
साक्षात् भूचाल ही आ जाएगा
मेरा Engineer होना क्या ख़ाक काम आएगा ?
कैसे न रखा जाए हमारा ख्याल, जिनके बगैर देश की IT Industry अधूरी है
इसलिए देश हित में अंग्रेजी जरूरी है .
अंग्रेजी अगर नहीं होगी तो ...
Universities में छात्रों की बाढ़ ही आ जायेगी
इतनी नौकरियां बेचारी सरकार कहाँ से लाएगी
फिर हड़ताल होगी, उपद्रव होंगे
इन सबसे देश को बचाना , प्रशासन की मजबूरी है
इसलिए देश हित में अंग्रेजी जरूरी है .......
अंग्रेजी अगर नहीं होती तो .....
कॉलेज अनुशासनहीनता का अड्डा बन जाते
क्यों ? इसलिए कि .....
मातृभाषा में lecture होगा, तो छात्र विषय समझ जायंगे
परिणामतः उल्टे सीधे सवाल पूछकर प्रोफेसर साहब का भेजा खायेंगे
हो-हल्ला मचाएंगे
तब प्रोफेसर साहब को घर पर ३-४ घंटे लगाकर lecture तैयार करना पड़ेगा
इस त्रासदी को शिक्षक वर्ग का पारिवारिक जीवन कैसे सहेगा ?
अनुशासनहीनता व शिक्षक वर्ग की असुविधा, इनकी तो राष्ट्र विकास से कोसों की दूरी है
इसलिए देश हित में अंग्रेजी जरूरी है .....
बुद्धिमान लोग सही फरमाते हैं
अंग्रेजी उच्च शिक्षा का माध्यम है
अंग्रेजी अगर नहीं होगी तो .....उच्च शिक्षा नहीं होगी
उच्च शिक्षा नहीं होगी तो कोई ऊँचा कैसे बनेगा
और ऊँचे की पूछ तो तभी होगी ना, जब कोई नीचा होगा
अतः विकसित समाज में उंच-नीच बनाये रखने की कवायद कौन सी बुरी है ?
इसलिए देश हित में अंग्रेजी जरूरी है ..................
मत लो धीरज की परीक्षा ...
शिष्टता की न्यूनतम हदों को भी किनारे कर
इतिहास की पुनरावृत्ति की कुचेष्टा में
फिर फन उठाने लगा है
वो विश्वासघाती व विस्तारवादी ड्रैगन
जी हाँ , वही
जिसने हिंदी - चीनी भाई भाई के मधुर नारों की आड़ में
६२ में हमारी ही पीठ में चुरा घोंपा
और उसी छद्म जीत के नशे में आज तक है उन्मत्त ...
वही
जिसने तिब्बत पर अवैध कब्जा कर
हिटलर की मानिंद प्रताडित किया है मानवता को ,
अपनी ही धरती से निर्वासित किया है लाखों तिब्बतियों को
अपमानित किया है देव तुल्य दलाई लामा को ....
वही
जिसने नेपाल में माओवादी आतंक को हवा देकर
और फिर अपनी कठपुतली सरकार बनवाकर
चली है शकुनि वाली अति कुटिल चाल
करने को भारत का हाल बेहाल .....
वही
जिसने कब्जा रखा है
हमारे कश्मीर का बहुत बड़ा हिस्सा
वही
जो कभी अरुणाचल को अपना हिस्सा बताता है
तो कभी सिक्किम पर अपना अधिकार जताता है
तो कभी हमारी सीमाओं में घुसकर
चट्टानों पर लाल चीन लिख कर भाग जाता है
ये ठीक है की
हम बुद्ध धर्म के हैं अनुयायी, हम शान्ति मन्त्र के उद्गाता
हम जग विख्यात अहिंसक हैं, हिंसा से अपना क्या नाता
किन्तु मेरी धरती पर गर कोई भी संकट आएगा
तो स्मरण रखो अशोक फिर से कर में तलवार उठाएगा
इसलिए मत छुओ आग को
मत मजबूर करो हमको, हमारे जवानों को
क्योंकि
हम वो हैं जो
राम बनकर साधन व शक्ति संपन्न रावण तक को परास्त किया करते हैं
हम वो है जो
शिवराज बनकर विराट दिखने वाले अफजल खान की भी अंतडियां खींच लिया करते हैं
हम वो है जो
राणा सांगा सम अस्सी घाव खाकर भी
शत्रु को रोंद दिया करते हैं
हम वो हैं जो
कभी सूरज न डूबने वाले ब्रिटिश शासन की भी
चूलें हिला दिया करते हैं
हम वो है जो
धींगरा बनकर
कर्जन वायली के घर में ही उसकी प्राण-लीला लील लिया करते हैं
हर भारतवासी को प्रिय है अपने राष्ट्र की सीमाओ की सुरक्षा
इसलिए हे नादान पडोसी मत लो हमारे धीरज की परीक्षा ...
मत लो हमारे धीरज की परीक्षा ...
मत लो हमारे धीरज की परीक्षा ....