झलके भारत माँ की भक्ति,
संघ तंत्र के मूल मन्त्र में !
छलके टप-टप प्रेम धरा का ,
जन-जन के हृदय अनंतर में !!
अहो भाग्य मिल गयी डगर ,
भटक चुके इन कदमों को !
पावन लक्ष्य पुनीत साध्य,
दे तृप्ति व्याकुल नयनों को !!
परम वैभव की भव्य उत्कंठा,
कोटि-कोटि कंठ आज गुंजाते हैं !
इस भग्न-विखण्डित राष्ट्र-देव को,
पुनः जोड़ने का प्राण उठाते हैं !!
एक पुंज से ज्योतित जगमग ,
तमस छिपा गहंतर में !
छलके टप-टप प्रेम धरा का ,
जन-जन के हृदय अनंतर में !!
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बहुत ही सुंदर मन के भाव सुंदर कविता के माध्यम से
ReplyDeleteसंघ शताब्दी वर्ष की प्रेरणा दायक कविता है जो हमारे मन को मजबूत बनाती हैं जिससे परम वैभव को प्राप्त कर सकें
ReplyDeleteउत्तम उत्तम उत्तम भाई - सुंदर सुंदर सुंदर भाई
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